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Ayurnirnaya By Acharya Mukund Daivagnya [RP]

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Description

[13:51, 10/8/2020] Raahul Lakhera: ग्रन्थ के प्रमुख आकर्षण

आयु की स्थिति क्या ? इस मानव सुलभ जिज्ञासा के लिए अनेक ज्ञात से अज्ञात विद्या। वास्तविक अवधि जान कर व्यावहारिक रूप-रेखा का ज्ञान । अल्पायु से लेकर लम्बी से लम्बी सम्भावित आयु के योग । गणित द्वारा विभिन्न पद्धतियों से अवधि का ज्ञान ।

मारकेश का विस्तृत विचार । अरिष्ट का प्रामाणिक एवं तर्क सम्मत निर्णय । रोगों व उनके कारणों का गूढ़ ज्ञान

ग्रहों की भाषा का स्पष्ट अर्थ जिसे आज तक गुप्त समझा जाता है। जीवन में नया उत्साह एवं ज्योतिष शास्त्र की

चमत्कारी वैज्ञानिकता का दिग्दर्शन । आकस्मिक दुर्घटनाएं : एक तार्किक विवेचन । कठिन विषय पर भारतीय परा विद्या की अपूर्व थाती। प्रस्तुति सहज एवं सरल जहाँ साधारण जानकार लाभ उठाएंगे. वहीं विवाद वर्ग प्राथमिकता को सराहा।

इस ग्रन्थ के पास होने पर कुछ और ज्ञातव्य नहीं रहता।
[13:51, 10/8/2020] Raahul Lakhera: विषय अनुक्रमण

-भूमिका

1-अष्टाधिकार

17-97

मंगलाचरण, आयु के प्रकार, बालारिष्ट, बालमृत्यु के तीन कारण, चतुर्दशी,भद्राप्रमृति में जन्म का फल, विष नवांश राशियों व चन्द्र के मृत्यु सूचकांक, गर्भिणी भरण योग, माता व बालक के मृत्यु योग, भालक की शोध मृत्यु के योग, एक सप्ताह में मरण योग, एक मास पर्यन्त आयु योग, तीन मास की आयु के योग, आठ मास के योग आयुहीन योग, उक्त योगों में मृत्यु समय परिज्ञान, बृहस्पति से आयु ज्ञान, रोगी बालक के योग, दो वर्ष की आयु, तीन वर्ष की आयु. चार-छह-सात-आठ वर्षे की आयु, चन्द्रारिष्ट की व्यवस्था, पताकी वेष से अरिष्ट, अर्थयामेश दण्डेश का ज्ञान दण्डीश साधन के अन्य प्रकार, निपताकी चक्र बनाना, राशियों के वेध व उनकी स्थापना, बालारिष्ट का समय वेध से मृत्यु समय, अरिष्टमंग, लग्नारिष्टमंग, गण्डान्त आदि दोष भंग, अन्द्रारिष्ट मंग, योगारिष्ट विचार, नौ वर्ष से बीस वर्ष तक आयु के विभिन्न योग ।

2--आयुरधिकार : अल्पायु-योग. इक्कीस से बत्तीस वर्ष की आयु के योग । मध्यायु योग--तीस से सत्तर वर्ष पर्यन्त आयु के विभिन्न योग । दीर्घायु योग-लम्बी आयु के योग, इकहत्तर वर्ष से नब्बे वर्ष पर्यन्त आयु योग, सौ वर्ष की आयु के योग, उत्तमायु योग, पूर्णायु योग, अमितायु योग, देवतुल्य आयु के योग, गुनि तुल्य आयु. इन्द्रपद प्राप्ति योग ।

98-152

3--मरणकारणाधिकार :

153-211

ग्रहों के धातु-दोष । अष्टमस्थ राशि व ग्रह से मृत्यु का कारण, अष्टम द्रष्टा ग्रह से मृत्यु, अष्टमगत द्रेष्काण से ग्रह व मृत्यु, अष्टमस्थ नवांश से मृत्यु, अष्टम भाव में उच्चागत ग्रह व मृत्यु, नीचोच्य नवांशादिगत ग्रह से मृत्यु, अष्टम में मित्र राशि नवांशगत ग्रह से मृत्यु, तर्गोत्तम ग्रह से मृत्यु शत्रु राशि नवांशगत ग्रह से मृत्यु स्वराशिगत ग्रह से मृत्यु अजीर्ण से मृत्यु, अन्नविकार या टीबी. से मृत्यु, पित्तादि विकार से

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